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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मनुष्य धर्म के पालन में निर्भय रहे।
Word-Meaning: - (यथा) जैसे (च) निश्चय करके (द्यौः) आकाश (च) और (पृथिवी) पृथिवी दोनों (न) न (रिष्यतः) दुःख देते हैं और (न) न (बिभीतः) डरते हैं। (एव) ऐसे ही, (मे) मेरे (प्राण) प्राण ! तू (मा बिभेः) मत डर ॥१॥
Connotation: - यह आकाश और पृथिवी आदि लोक परमेश्वर के नियमपालन से अपने-अपने स्थान और मार्ग में स्थिर रहकर जगत् का उपकार करते हैं, ऐसे ही मनुष्य ईश्वर की आज्ञा मानने से पापों को छोड़कर और सुकर्मों को करके सदा निर्भय और सुखी रहता है ॥१॥
Footnote: १–यथा। येन प्रकारेण। द्यौः। अ० २।१२।६। द्योतन्ते लोका यत्र। आकाशम्। च। निश्चये। समुच्चये। पृथिवी। अ० १।२।१। प्रथ विस्तारे–षिवन्, ङीष्। भूमिः। सत्तास्थानम्। न। निषेधे। बिभीतः। ञिभी भये। दरं त्रासं प्राप्नुतः। रिष्यतः। रिष हिंसायाम्, दिवादिः सकर्मकः। हिनस्तः। आज्ञाभङ्गं कुरुतः–इत्यर्थः। एव। एवम्। तथा। मे। मम। प्राण। प्र+अन् जीवने–अच्, घञ् वा। हे आत्मन्। मा बिभेः। ञिभी भये, लङ्। त्वं शङ्कां मा कार्षीः ॥
