Reads 53 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
निर्धनता मनुष्यों को प्रयत्न से नष्ट करनी चाहिये।
Word-Meaning: - [हे पीड़ाओं !] (यदि) यदि (क्षेत्रियाणाम्) शरीरसम्बन्धी, वा वंशसम्बन्धी रोगों की (वा) अथवा (यदि) यदि (पुरुषेषिताः) अन्य पुरुषों की प्रेषित (स्थ) हो, (यदि) जो (दस्युभ्यः) चोर आदिकों से (जाताः) प्रकट हुयी (स्थ) हो, वह तुम (सदान्वाः) हे सदा चिल्लानेवाली, अथवा, दानवों के साथ रहनेवाली [पीड़ाओ !] (इतः) यहाँ से (नश्यत) हट जाओ ॥५॥
Connotation: - मनुष्यों को अपने कुपथ्यसेवन, ब्रह्मचर्य आदि के खण्डन से अथवा माता-पिता आदि के कुसंस्कार से, शारीरिक वा अध्यात्मिक और शत्रु चोर आदि के अन्यथा व्यवहार से आधिभौतिक पीड़ाएँ प्राप्त होती हैं। मनुष्य पुरुषार्थ से सब प्रकार के क्लेशों का नाश करके आनन्द से रहें ॥५॥
Footnote: ५–यदि। पक्षान्तरम्। चेत्। स्थ। यूयं भवथ। क्षेत्रियाणाम्। अ० २।८।१। स्वकीये देहे वंशे वा जातानां रोगाणाम्। पुरुषेषिताः। पुरः कुषन्। उ० ४।७४। इति पुर अग्रगतौ–कुषन्। पुरति अग्रे गच्छतीति पुरुषः। इष गतौ यद्वा, ईष दाने–कर्मणि निष्ठा, इडागमः। अन्यजनैः प्रेषिताः प्रेरिता दत्ता वा। दस्युभ्यः। यजिमनिशुन्धिदसिजनिभ्यो युच्। उ० ३।२०। इति दसु उपक्षये–युच्। बाहुलकाद् अनादेशाभावः। दस्यति नाशयति परपदार्थानिति दस्युः। चोरादिभ्यः सकाशात्। जाताः। प्रादुर्भूताः। नश्यत। णश अदर्शने, दिवादिः। तिरोभवत। निर्गच्छत। सदान्वाः। म० १। हे सर्वदा शब्दयित्र्यः, यद्वा, दानवैः सह वर्त्तमानाः ॥
