सबकी रक्षा के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (द्यावापृथिवी=०–व्यौ) हे सूर्य और पृथिवी ! (मा) मुझ पर (अनु=अनुलक्ष्य) अनुग्रह करके (आ) भले प्रकार (दीधीथाम्) दोनों प्रकाशित हों, (विश्वे) हे सब (देवासः=०–वाः) उत्तम गुणवाले महात्माओं ! (मा) मुझ पर (अनु) अनुग्रह करके (आ) भले प्रकार (रभध्वम्) उत्साही बनो। (अङ्गिरसः) हे ज्ञानी पुरुषों ! (पितरः) हे रक्षक पिताओ ! (सोम्यासः=०–म्याः) हे सौम्य, मनोहर गुणवाले विद्वानो ! (अपकामस्य) अनिष्ट का (कर्त्ता) कर्त्ता (पापम्) दुःख (आ+ऋच्छतु) प्राप्त करे ॥५॥
Connotation: - मनुष्य को प्रयत्न करना चाहिये कि सूर्य और पृथिवी अर्थात् संसार के सब पदार्थ अनुकूल रहें और बड़े-बड़े उपकारी विद्वानों के सत्सङ्ग से डाकू उचक्के आदि को यथोचित दण्ड देकर और वश में करके शान्ति रक्खे ॥५॥