सबकी रक्षा के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (तिसृभिः) तीन (अशीतिभिः) व्याप्तियों [अर्थात् ईश्वर, जीव और प्रकृति] से (सामगेभिः=०–गैः) मोक्षविद्या [ब्रह्मविद्या] के गानेवाले, (आदित्येभिः=०–त्यैः) सर्वथा दीप्यमान, (वसुभिः) प्रशस्त गुणवाले (अङ्गिरोभिः) ज्ञानी पुरुषों के साथ (पितॄणाम्) रक्षक पिताओं [पिता के समान उपकारियों] के (इष्टापूर्तम्) यज्ञ, वेदाध्ययन, अन्नदानादि पुण्य कर्म (नः) हमें (अवतु) तृप्त करें, (दैव्येन) विद्वानों के सम्बन्धी (हरसा) तेज से (अमुम्) उस [दुष्ट] को (आ+ददे) मैं पकड़ता हूँ ॥४॥
Connotation: - राजा बहुत से सत्यवादी, सत्यपराक्रमी, सर्वहितैषी, निष्कपटी, विद्वानों की सम्मति और सहाय और बड़े-बड़े पुरुषों के पुण्य कर्मों के अनुकरण और दुष्टों को दण्ड दान से प्रजा में शान्ति स्थापित करके सदा सुखी रहे ॥४॥