Go To Mantra
Viewed 83 times

अ॒यमौदु॑म्बरो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते। स नः॑ स॒निं मधु॑मतीं कृणोतु र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छात् ॥

Mantra Audio
Pad Path

अयम्। औदुम्बरः। मणि। वीरः। वीराय। बध्यते। सः। नः। सनिम्। मधुऽमतीम्। कृणोतु। रयिम्। च। नः। सर्वऽवीरम्। नि। यच्छात् ॥३१.१४॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:31» Paryayah:0» Mantra:14


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ऐश्वर्य की प्राप्ति का उपदेश।

Word-Meaning: - (अयम्) यह (औदुम्बरः) संघटन चाहनेवाला, (मणिः) प्रशंसनीय (वीरः) वीर [परमात्मा] (वीराय) वीर पुरुष के लिये (बध्यते) धारण किया जाता है। (सः) वह (नः) हमारे लिये (मधुमतीम्) ज्ञानयुक्त (सनिम्) लाभ (कृणोतु) करे, (च) और (नः) हमारे लिये (सर्ववीरम्) सबका वीर बनानेवाला (रयिम्) धन (नि यच्छात्) नियत करे ॥१४॥
Connotation: - जो मनुष्य परमेश्वर के स्थिर कोश और नित्य दान का विचार करके पुरुषार्थ करते हैं, वे स्थिर निधि स्थापित करके सब मनुष्यों को वीर बनाते हैं ॥१४॥
Footnote: १४−(अयम्) प्रसिद्धः (औदुम्बरः) म०१। संहतिस्वीकर्ता (मणिः) प्रशंसनीयः (वीरः) पराक्रमी परमात्मा (वीराय) पराक्रमिणे पुरुषाय (बध्यते) धार्यते (सः) तादृशः (नः) अस्मभ्यम् (सनिम्) लब्धिम् (मधुमतीम्) ज्ञानयुक्ताम् (कृणोतु) करोतु (रयिम्) धनम् (नः) अस्मभ्यम् (सर्ववीरम्) सर्वेषां वीरकरम् (नि यच्छात्) नियतं कुर्यात् ॥