Go To Mantra
Viewed 130 times

वृ॒श्च द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे वृ॒श्च मे॑ पृतनाय॒तः। वृ॒श्च मे॒ सर्वा॑न्दु॒र्हार्दो॑ वृ॒श्च मे॑ द्विष॒तो म॑णे ॥

Mantra Audio
Pad Path

वृश्च। दर्भ। सऽपत्नान्। मे। वृश्च। मे। पृतनाऽयतः। वृश्च। मे। सर्वान्। दुऽहार्दः। वृश्च। मे। द्विषतः। मणे ॥२८.७॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:28» Paryayah:0» Mantra:7


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सेनापति के लक्षणों का उपदेश।

Word-Meaning: - (दर्भ) हे दर्भ ! [शत्रुविदारक सेनापति] (मे) मेरे (सपत्नान्) वैरियों को (वृश्च) काट डाल, (मे) मेरे लिये (पृतनायतः) सेना चढ़ा लानेवालों को (वृश्च) काट डाल। (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दुर्हार्दः) दुष्ट हृदयवालों को (वृश्च) काट डाल, (मणे) हे प्रशंसनीय ! (मे) मेरे (द्विषतः) वैरियों को (वृश्च) काट डाल ॥७॥
Connotation: - स्पष्ट है ॥७॥
Footnote: ७−(वृश्च) ओव्रश्चू छेदने। छिन्द्धि ॥