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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
Word-Meaning: - (महत्काण्डाय) बड़े [धर्मात्माओं] के संरक्षक [वेद] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१८॥
Connotation: - मनुष्यों को परमेश्वरोक्त ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद द्वारा श्रेष्ठ विद्याएँ प्राप्त करके इस जन्म और पर जन्म का सुख भोगना चाहिये ॥१८॥
Footnote: १८−(महत्काण्डाय) कादिभ्यः कित्। उ०१।११५। कमु कन वा कान्तौ-ड प्रत्ययो दीर्घश्च, यद्वा कडि भेदने संरक्षणे च-घञ्। महतां विदुषां संरक्षकाय वेदाय ॥
