Go To Mantra
Viewed 123 times

सूर्यं॒ ते द्यावा॑पृथि॒वीव॑न्तमृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यव॑ प्र॒तीच्याः॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

Mantra Audio
Pad Path

सूर्यम्। ते। द्यावापृथिवीऽवन्तम्। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। प्रतीच्याः।दिशः। अभिऽदासात् ॥१८.५॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:18» Paryayah:0» Mantra:5


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

रक्षा के प्रयत्न का उपदेश।

Word-Meaning: - (ते) वे [दुष्ट] (द्यावापृथिवीवन्तम्) सूर्य और पृथिवी के स्वामी (सूर्यम्) सर्वप्रेरक परमात्मा की (ऋच्छन्तु) सेवा करें। (ये) जो (अघायवः) बुरा चीतनेवाले (मा) मुझे (प्रतीच्याः) पश्चिम वा पीछेवाली (दिशः) दिशा से (अभिदासात्) सताया करें ॥५॥
Connotation: - मन्त्र १ के समान है ॥५॥
Footnote: ५−(सूर्यम्) सर्वप्रेरकं परमात्मानम् (द्यावापृथिवीवन्तम्) छन्दसीरः। पा०८।२।१५। मतुपो मस्य वः। सूर्यपृथिव्योः स्वामिनम् (प्रतीच्याः) पश्चिमायाः। पृष्ठतः स्थितायाः। अन्यत् पूर्ववत् ॥