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वरु॑णं॒ त आ॑दि॒त्यव॑न्तमृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

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वरुणम्। ते। आदित्यऽवन्तम्। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। एतस्याः। दिशः। अभिऽदासात् ॥१८.४॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:18» Paryayah:0» Mantra:4


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

रक्षा के प्रयत्न का उपदेश।

Word-Meaning: - (ते) वे [दुष्ट] (आदित्यवन्तम्) प्रकाशमान गुणों के स्वामी (वरुणम्) सबमें उत्तम परमेश्वर की (ऋच्छन्तु) सेवा करें। (ये) जो (अघायवः) बुरा चीतनेवाले (मा) मुझे (एतस्याः) इस [बीचवाली] (दिशः) दिशा से (अभिदासात्) सताया करें ॥४॥
Connotation: - मन्त्र १ के समान है॥४॥
Footnote: ४−(वरुणम्) सर्वोत्तमं परमेश्वरम् (आदित्यवन्तम्) प्रकाशमानगुणानां स्वामिनम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥