Go To Mantra
Viewed 125 times

सूर्यो॑ मा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ प्र॒तीच्या॑ दि॒शः पा॑तु॒ तस्मि॑न्क्रमे॒ तस्मि॑ञ्छ्रये॒ तां पुरं॒ प्रैमि॑। स मा॑ रक्षतु॒ स मा॑ गोपायतु॒ तस्मा॑ आ॒त्मानं॒ परि॑ ददे॒ स्वाहा॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

सूर्यः। मा। द्यावापृथिवीभ्याम्। प्रतीच्याः। दिशः। पातु। तस्मिन्। क्रमे। तस्मिन्। श्रये। ताम्। पुरम्। प्र। एमि। सः। मा। रक्षतु। सः। मा। गोपायतु। तस्मै। आत्मानम्। परि। ददे। स्वाहा ॥१७.५॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:17» Paryayah:0» Mantra:5


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

रक्षा करने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सूर्यः) सर्वप्रेरक परमात्मा (द्यावापृथिवीभ्याम्) दोनों सूर्य और पृथिवी के साथ (मा) मुझे (प्रतीच्याः) पश्चिम वा पीछेवाली (दिशः) दिशा से (पातु) बचावे, (तस्मिन्) उसमें..... [म०१] ॥५॥
Connotation: - मन्त्र १ के समान है ॥५॥
Footnote: ५−(सूर्य) सुवतेः क्यप्। सर्वप्रेरकः परमेश्वरः। (द्यावापृथिवीभ्याम्)। सूर्यभूमिभ्याम् (प्रतीच्याः) पश्चिमायाः। पश्चाद् भवायाः। अन्यत् पूर्ववत् ॥