Reads 73 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अभय और रक्षा का उपदेश।
Word-Meaning: - (नः) हमारे लिये (मा) मुझको (पुरस्तात्) सामने [वा पूर्वदिशा] से (पश्चात्) पीछे [वा पश्चिम] से, (दक्षिणतः) दाहिनी और [वा दक्षिण] से और (मा) मुझको (उत्तरात्) बाईं ओर [वा उत्तर] से (सविता) सर्वप्ररेक राजा और (शचीपतिः) वाणियों वा कर्मों का पालनेवाला [मन्त्री], तुम दोनों (असपत्नम्) शत्रुरहित और (अभयम्) निर्भय (कृतम्) करो ॥१॥
Connotation: - जहाँ पर राजा और मन्त्री अपनी वाणी और कर्म में पक्के होते हैं, उस राज्य में प्रजागण शत्रुओं से सुरक्षित रहते हैं ॥१॥
Footnote: १−(असपत्नम्) शत्रुरहितम् (पुरस्तात्) अग्रे। पूर्वस्यां दिशि (पश्चात्) पश्चाद् भागे पश्चिमस्यां दिशि (नः) अस्मभ्यम् (अभयम्) (कृतम्) लोटि छान्दसं रूपम्। युवां कुरुतम् (सविता) सर्वप्रेरको राजा (मा) माम् (दक्षिणतः) दक्षिणभागे। दक्षिणस्यां दिशि (उत्तरात्) उपरिभागे। उत्तरस्यां दिशि (मा) माम् (शचीपतिः) शची वाङ्नाम-निघ०१।११ कर्मनाम-निघ०२।१। वाणीनां कर्मणां वा पालको मन्त्री ॥
