इन्द्रं॑ व॒यम॑नूरा॒धं ह॑वाम॒हेऽनु॑ राध्यास्म द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा। मा नः॒ सेना॒ अर॑रुषी॒रुप॑ गु॒र्विषू॑चीरिन्द्र द्रु॒हो वि ना॑शय ॥
इन्द्रम्। वयम्। अनुऽराधम्। हवामहे। अनु। राध्यास्म। द्विऽपदा। चतुःऽपदा। मा। नः। सेनाः। अररुषीः। उप। गुः। विषूचीः। इन्द्र। द्रुहः। वि। नाशय ॥१५.२॥
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा के कर्त्तव्य का उपदेश।
