सेनापति के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (इन्द्रः) इन्द्र [महाप्रतापी मुख्य सेनापति] (एषाम्) इन [वीरों] का (नेता) नेता [होवे], (बृहस्पतिः) बृहस्पति [बड़े अधिकारों का स्वामी सेनानायक] (दक्षिणा) दाहिनी ओर और (यज्ञः) पूजनीय, (सोमः) सोम [प्रेरक, उत्साहक सेनाधिकारी] (पुरः) आगे (एतु) चले। (मरुतः) मरुद्गण [शूरवीर पुरुष] (अभिभञ्जतीनाम्) कुचल डालती हुई, (जयन्तीनाम्) विजयिनी (देवसेनानाम्) विजय चाहनेवालों की सेनाओं के (मध्ये) बीच में (यन्तु) चलें ॥९॥
Connotation: - व्यूहरचना में अपनी-अपनी सेना लेकर मुख्य सेनापति की दाहिनी ओर को बृहस्पति नाम सेनाधिकारी हो, सोम नाम सेनाध्यक्ष सबसे आगे और अन्य मरुद्गण शूरवीर योद्धा बीच में रहे। इसी प्रकार चक्रव्यूह, पद्मव्यूह आदि अनेक व्यूहरचनाओं से शत्रुओं को जीतें ॥९॥