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ये दे॒वाना॑मृ॒त्विजो॑ य॒ज्ञिया॑सो॒ मनो॒र्यज॑त्रा अ॒मृता॑ ऋत॒ज्ञाः। ते नो॑ रासन्तामुरुगा॒यम॒द्य यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥

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Pad Path

ये। देवानाम्। ऋत्विजः। यज्ञियासः। मनोः। यजत्राः। अमृताः। ऋतऽज्ञाः। ते। नः। रासन्ताम्। उरुऽगायम्। अद्य। यूयम्। पात। स्वस्त‍िऽभिः। सदा। नः ॥११.५॥

Atharvaveda » Kand:19» Sukta:11» Paryayah:0» Mantra:5


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

इष्ट की प्राप्ति का उपदेश।

Word-Meaning: - (ये) जो लोग (देवानाम्) विद्वानों के बीच (ऋत्विजः) ऋतु-ऋतु में यज्ञ [श्रेष्ठ व्यवहार] करनेहारे, (यज्ञियासः) पूजायोग्य, (मनोः) ज्ञान के (यजत्राः) देनेहारे, (अमृताः) अमर [कीर्तिवाले] और (ऋतज्ञाः) सत्य धर्म के जाननेहारे हैं। (ते) वे (नः) हमें (अद्य) आज (उरुगायम्) चौड़ा मार्ग [वा बहुत ज्ञान] (रासन्ताम्) देवें, (यूयम्) तुम [विद्वानों] (स्वस्तिभिः) अनेक सुखों से (सदा) सदा (नः) हमारी (पात) रक्षा करो ॥५॥
Connotation: - जो लोग विद्वानों में महाविद्वान्, जीवन्मुक्त, परोपकारी हों, उनकी आज्ञा पालन करके हम सदा सुखी रहें ॥५॥
Footnote: ५−(ये) महाविद्वांसः (देवानाम्) विदुषां मध्ये (ऋत्विजः) ऋतावृतौ यष्टारः श्रेष्ठकर्मकर्त्तारः (यज्ञियासः) पूजार्हाः (मनोः) ज्ञानस्य (यजत्राः) दातारः (अमृताः) अमराः। कीर्तिमन्तः (ऋतज्ञाः) सत्यधर्मस्य ज्ञातारः (ते) पूर्वोक्ताः (नः) अस्मभ्यम् (रासन्ताम्) ददतु (उरुगायम्) गै शब्दे गाङ् गतौ-वा-घञ्, युगागमः विस्तीर्णमार्गम्। बहुज्ञानम् (अद्य) अस्मिन् दिने (यूयम्) (पात) रक्षत (स्वस्तिभिः) कल्याणैः (सदा) (नः) अस्मान् ॥