Word-Meaning: - [हे विद्वान् पुरुष !] (ते) तेरे लिये (इदम्) यह [कार्यरूप जगत्] (एकम्) एक [ज्योति तुल्य] है, (उ) और (परः) परे [आगे बढ़कर] (ते) तेरे लिये (एकम्) एक [कारणरूप जगत् ज्योति समान]है, (तृतीयेन) तीसरी (ज्योतिषा) ज्योति [प्रकाशस्वरूप परब्रह्म] के साथ (सम्)मिलकर (विशस्व) प्रवेश कर। (संवेशने) यथावत् प्रवेशविधि में (तन्वा) [अपनी]उपकार क्रिया से (चारुः) शोभायमान और (परमे) बड़े ऊँचे (सधस्थे) समाज में (देवानाम्) विद्वानों का (प्रियः) प्रिय (एधि) हो ॥७॥
Connotation: - मनुष्य स्थूल औरसूक्ष्म जगत् के तत्त्व को परमात्मा के ज्ञान के साथ जानकर विद्या द्वारा उपकारकरता हुआ विद्वानों में उच्च पद प्राप्त करे ॥७॥यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद मेंहै−१०।५६।१। और सामवेद में पू० १।७।३ ॥