पितरों के गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (ये) जो पुरुष (नः)हमारे (पितुः) पिता के (पितरः) पिता के समान हैं, और (ये) जो [उसके] (पितामहाः)दादे के तुल्य हैं, और (ये) जो (उरु) चौड़े (अन्तरिक्षम्) आकाश में [विद्याबलसे विमान आदि द्वारा] (आविविशुः) प्रविष्ट हुए हैं और (ये) जो (पृथिवीम्)पृथिवी (उत) और (द्याम्) आकाश में (आक्षियन्ति) सब प्रकार शासन करते हैं, (तेभ्यः) उन (पितृभ्यः) पितरों [रक्षक महात्माओं] की (नमसा) अन्न से (विधेम) हमसेवा करें ॥४९॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जोतुम्हारे पिता दादे, परदादे आदि बड़े योगी विद्वान् होकर विद्याबल से विमान आदिद्वारा आकाश में पहुँचे हैं और जो पृथिवी और आकाश में राज्य करते हैं, उनका अन्नआदि से सत्कार करके अपनी उन्नति करो ॥४९॥इस मन्त्र का पूर्वार्द्ध आगे है-अथ०१८।३।५९ ॥