पितरों और सन्तानों के कर्त्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (यम) हे संयमी जन ! (अङ्गिरोभिः) महाविज्ञानी, (यज्ञियैः) पूजायोग्य पुरुषों के साथ (इह) यहाँ [समाज में] (आ गहि) तू आ, और (वैरूपैः) विविध पदार्थों के निरूपण करनेवाले वेदज्ञानों से (इह) यहाँ (मादयस्व) [हमें] तृप्त कर। (अस्मिन्) इस (बर्हिषि) उत्तमपद पर (आ) भले प्रकार (निषद्य) बैठकर (विवस्वन्तम्) प्रकाशमय परमात्मा को (हुवे)मैं बुलाता हूँ, (यः) जो (ते) तेरा (पिता) पालक है ॥५९॥
Connotation: - जितेन्द्रिय विद्वान्पुरुष विविध विद्वानों के सत्सङ्ग से अनेक विद्याएँ प्राप्त करके वेदाभ्यासद्वारा परमात्मा का विचार करें ॥५९॥मन्त्र ५९, ६० कुछ भेद से ऋग्वेद में हैं−१०।१४।५, ४ और दोनों मन्त्र महर्षिदयानन्दकृतसंस्कारविधि अन्त्येष्टिप्रकरणमें उद्धृत हैं ॥