परमात्मा की शक्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - (प्रवतः) उत्तमगतिवाली (महीः) बड़ी भूमियों को (परेयिवांसम्) पराक्रम से पहुँच चुके हुए, (इति) इसी से, (बहुभ्यः) बहुत से [लोकों और जीवों] के लिये (पन्थाम्) मार्ग (अनुपस्पशानम्) गाँठनेवाले (वैवस्वतम्) सूर्यलोकों में विदित, (जनानाम्)मनुष्यों के (संगमनम्) मेल करानेवाले (यमम्) यम [न्यायकारी परमात्मा] (राजानम्)राजा [शासक] को (हविषा) भक्ति के साथ (सपर्यत) तुम पूजो ॥४९॥
Connotation: - जो परमात्मा सब लोकोंमें व्यापक और सूर्य आदि का आकर्षक और मनुष्य आदि का नियामक है, सब लोग उसकीउपासना से उन्नति करें ॥४९॥मन्त्र ४९, ५० कुछ भेद से ऋग्वेद में−१०।१४।१, २। औरऋग्वेदपाठ महर्षिदयानन्दकृत संस्कारविधि अन्त्येष्टिप्रकरण में उद्धृत हैं॥