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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आयु की बढ़ती के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (सूर्य) हे सूर्य ! [सबके चलानेवाले जगदीश्वर] (स्वस्तये) [हमारे] आनन्द के लिये (शतारित्राम्)सैकड़ों डाड़ोंवाली (नावम्) नाव पर (आ अरुक्षः) तू चढ़ा है। (मा) मुझ से (रात्रिम्) रात्रि को (अति अपीपरः) तूने सर्वथा पार कराया है, (अहः) दिन (सत्रा)भी (अति पारय) सर्वथा तू पार करा ॥२६॥
Connotation: - जो जगदीश्वर इस संसारको विविध प्रकार चला रहा है, मनुष्य उसकी महती कृपा से रात्रि का कर्त्तव्य पूराकरके दिन का कर्त्तव्य पूरा करने का उद्योग करें, और इस मन्त्र से प्रातःकाल मेंप्रार्थना करें ॥२६॥
Footnote: २६−(सूर्य) हे सर्वप्रेरक जगदीश्वर (रात्रिम्) रात्रिकर्त्तव्यम् (अहः) दिनकर्त्तव्यम्। अन्यत् पूर्ववत्-म० २५॥
