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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आयु की बढ़ती के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (आदित्यः) हे आदित्यः ! [अखण्ड प्रभाववाले परमात्मा] (स्वस्तये) [हमारे] आनन्द के लिये (शतारित्राम्)सैकड़ों डाड़वाली (नावम्) नाव पर (आ अरुक्षः) तू चढ़ा है। (मा) मुझ से (अहः)दिन (अति अपीपरः) तूने सर्वथा पार कराया है, (रात्रिम्) रात्रि (सत्रा) भी (अतिपारय) तू सर्वथा पार करा ॥२५॥
Connotation: - जो परमात्मा अनेकप्रकार जगत् को चला रहा है, मनुष्य उसकी अनन्त कृपा से दिन का कर्तव्य पूरा करकेरात्रि का कर्तव्य पूरा करने का प्रयत्न करें, और इस मन्त्र से सायंकाल मेंप्रार्थना करें ॥२५॥
Footnote: २५−(आदित्यः) म० २४। हे अखण्डप्रभाव परमात्मन् (नावम्) (आअरुक्षः) आरूढवानसि (शतारित्राम्) शतं बहूनि अरित्राणि उदकाकर्षणसाधनानिविद्यन्ते यस्यां ताम् (स्वस्तये) क्षेमाय (अहः) दिनकार्यमित्यर्थः (मा) माम् (अति अपीपरः) पॄ पालनपूरणयोः-णिचि लुङ्। पारं प्रापितवानसि (रात्रिम्)रात्रिकर्तव्यमित्यर्थः (सत्रा) सत्यं निश्चयेन (अति पारय) पॄ-णिचि, यद्वा, पारकर्मसमाप्तौ-लोट्। सर्वथा पारं गमय ॥
