Go To Mantra

उ॑द्य॒ते नम॑उदाय॒ते नम॒ उदि॑ताय॒ नमः॑। वि॒राजे॒ नमः॑ स्व॒राजे॒ नमः॑ स॒म्राजे॒ नमः॑॥

Mantra Audio
Pad Path

उत्ऽयते । नम: । उत्ऽआयते । नम: । उत्ऽइताय । नम: । विऽराजे । नम: । स्वऽराजे । नम: । सम्ऽराजे । नम: ॥१.२२॥

Atharvaveda » Kand:17» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:22


Reads 63 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

आयु की बढ़ती के लिये उपदेश।

Word-Meaning: - (उद्यते) उदय होतेहुए [परमेश्वर] को (नमः) नमस्कार है, (उदायते) ऊँचे आते हुए को (नमः) नमस्कारहै, (उदिताय) उदय हो चुके हुए को (नमः) नमस्कार है। (विराजे) विविध राजा को (नमः) नमस्कार है, (स्वराजे) अपने आप राजा को (नमः) नमस्कार है, (सम्राजे)सम्राट् [राजराजेश्वर] को (नमः) नमस्कार है ॥२२॥
Connotation: - परमात्मा एक प्रलय औरसृष्टि की सन्धि दशा में, दूसरे सृष्टि करने की दशा में और तीसरे सृष्टि कीसमाप्ति में अपनी महिमा विविध प्रकार प्रकट करता है, उस सर्वशक्तिमान् अद्वितीयजगदीश्वर की आज्ञा में रहकर हम सदा आनन्दित रहें ॥२२॥
Footnote: २२−(उद्यते)प्रलयसृष्टिसन्धिदशायामुदयं गच्छते परमेश्वराय (नमः) नमस्कारः (उदायते)उत्+आङ्+इण् गतौ-शतृ। सृष्टिकाल उदयमागच्छते (उदिताय) सृष्टिसमाप्तिकाल उदयंप्राप्ताय (विराजे) विविधेश्वराय (स्वराजे) स्वयमैश्वर्यवते (सम्राजे)राजराजेश्वराय। अन्यद् गतम् ॥