Go To Mantra

तस्मा॑द॒मुंनिर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः ॥

Mantra Audio
Pad Path

तस्मात् । अमुम् । नि: । भजाम: । अमुम् । आमुष्यायणम् । अमुष्या: । पुत्रम् । असौ । य: ॥८.३१॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:8» Paryayah:0» Mantra:31


Reads 59 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

Word-Meaning: - (तस्मात्) उस [पद] से (अमुम्) अमुक (अमुम्) अमुक पुरुष (आमुष्यायणम्) अमुक पुरुष के सन्तान, (अमुष्याः) अमुक स्त्री के (पुत्रम्) पुत्र को (निः भजामः) हम भागरहित करतेहैं, (असौ यः) वह जो [कुमार्गी] है−[म० २] ॥३१॥
Connotation: - विद्वान् धर्मवीर राजासुवर्ण आदि धन और सब सम्पत्ति का सुन्दर प्रयोग करे और अपने प्रजागण और वीरों कोसदा प्रसन्न रख कर कुमार्गियों को कष्ट देकर नाश करे॥३१॥