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स ग्राह्याः॑पाशा॒न्मा मो॑चि ॥

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स: । ग्राह्या: । पाशात् । मा । मोचि ॥८.३॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:8» Paryayah:0» Mantra:3


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [कुमार्गी] (ग्राह्याः) गठिया रोग के (पाशात्) बन्धन से (मा मोचि) न छूटे ॥३॥
Connotation: - विद्वान् धर्मवीर राजासुवर्ण आदि धन और सब सम्पत्ति का सुन्दर प्रयोग करे और अपने प्रजागण और वीरों कोसदा प्रसन्न रख कर कुमार्गियों को कष्ट देकर नाश करे ॥१-४॥
Footnote: ३−(सः) कुमार्गी (ग्राह्याः) ग्राहीरोगस्य (पाशात्) बन्धनात् (मा मोचि) न मुक्तो भवतु ॥