Go To Mantra

यददोअदोअ॒भ्यग॑च्छ॒न् यद्दोषा यत्पूर्वां॒ रात्रि॑म् ॥

Mantra Audio
Pad Path

यत् । अद:ऽवद: । अभिऽअगच्छन् । यत् । दोषा । यत् । पूर्वाम् । रात्रिम् ॥७.९॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:7» Paryayah:0» Mantra:9


Reads 62 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

Word-Meaning: - (यत्) जैसे (अदो अदः)उस-उस समय पर (यत्) जो [कष्ट] (दोषा) रात्रि में, (यत्) जो [कष्ट] (पूर्वांरात्रिम्) रात्रि के पूर्व भाग में (अभ्यगच्छन्) उन [पूर्वज लोगों] ने सामने सेपाया है ॥९॥
Connotation: - जैसे पूर्वज विद्वान्लोग बड़े-बड़े कष्ट सहकर दुराचारी असुरों को हराते आये हैं, वैसे ही मनुष्यक्लेशें सहकर दुष्टों को हराकर शिष्टों का पालन करते रहें ॥९, १०, ११॥
Footnote: ९−(यत्) यथा (अदोअदः)तस्मिंस्तस्मिन् समये (अभ्यगच्छन्) ते पूर्वजा आभिमुख्येन प्राप्नुवन् (यत्)कष्टम् (दोषा) रात्रौ (यत्) (पूर्वाम्) पूर्वभागभवायाम् (रात्रिम्) ॥