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तं ज॑हि॒ तेन॑मन्दस्व॒ तस्य॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणीहि ॥

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यत् । जहि । तेन । मन्दस्य । तस्य । पृष्टी: । अपि । शृणहि ॥७.१२॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:7» Paryayah:0» Mantra:12


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रु के नाश करने का उपदेश।

Word-Meaning: - (तम्) उस [कुमार्गी]को (जहि) नाश करदे, (तस्य) उसकी (पृष्टीः) पसलियाँ (अपि) सर्वथा (शृणीहि) तोड़डाल, (तेन) उस [शूर कर्म] से (मन्दस्व) तू चल ॥१२॥
Connotation: - बुद्धिमान् शूर लोगदुष्टों को नाश करके सदा आगे बढ़ते रहें ॥१२॥
Footnote: १२−(तम्) कुमार्गिणम् (जहि) नाशय (तेन) शूरकर्मणा (मन्दस्व) मदि स्तुतिगत्यादिषु। गच्छ (तस्य) दुष्टस्य (पृष्टीः) पार्श्वास्थीनि (अपि) सर्वथा (शृणीहि) विदारय ॥