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तं त्वा॑ स्वप्न॒तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्न दुः॒ष्वप्न्या॑त्पाहि ॥

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तम् । त्वा । स्वप्न । तथा । सम् । विद्म । स: । न: । स्वप्न । दु:ऽस्वप्न्यात् । पाहि ॥५.१०॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:5» Paryayah:0» Mantra:10


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

आलस्यादिदोष के त्याग के लिये उपदेश।

Word-Meaning: - (स्वप्न) हे स्वप्न [आलस्य] (तम्) उस (त्वा) तुझको (तथा) वैसा ही (सम्) अच्छे प्रकार (विद्म) हमजानते हैं, (सः) सो तू (स्वप्न) हे स्वप्न ! (नः) हमें (दुःष्वप्न्यात्) बुरीनिद्रा में उठे कुविचार से (पाहि) बचा ॥१०॥
Connotation: - मन्त्र १-३ के समान है॥८-१०॥