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उप॑हूतो मेगो॒पा उप॑हूतो गोपी॒थः ॥

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उपऽहूत: । मे । गोपा: । उपऽहूत: । गोपीथ: ॥२.३॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:2» Paryayah:0» Mantra:3


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

इन्द्रियों की दृढ़ता का उपदेश।

Word-Meaning: - (गोपाः) वाणी का रक्षक [आचार्य] (मे) मेरा (उपहूतः) आदर से बुलाया हुआ है और (गोपीथः) भूमि का रक्षक [राजा] (उपहूतः) आदर से बुलाया हुआ है ॥३॥
Connotation: - मनुष्य आचार्य कीशिक्षा और राजा की व्यवस्था से सुशिक्षित होकर स्वस्थ और प्रतिष्ठित रहें॥३॥
Footnote: ३−(उपहूतः) आदरेणाऽऽवाहनीकृतः (मे) मम (गोपाः) वाणीरक्षक आचार्यः (उपहूतः) (गोपीथः) निशीथगोपीथावगथाः। उ० २।९। गो+पा रक्षणे-थक्, ईत्वम्। भूपालः। राजा ॥