Go To Mantra

इन्द्र॑स्य वइन्द्रि॒येणा॒भि षि॑ञ्चेत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

इन्द्रस्य । व: । इन्द्रियेण । अभि । सिञ्चेत् ॥१.९॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:9


Reads 60 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

दुःख से छूटने का उपदेश।

Word-Meaning: - वह [परमात्मा] (वः)तुम को (इन्द्रस्य) बड़े ऐश्वर्यवान् पुरुष के [योग्य] (इन्द्रियेण) बड़ेऐश्वर्य से (अभि षिञ्चेत्) अभिषेकयुक्त [राज्य का अधिकारी] करे ॥९॥
Connotation: - विद्वान् लोग उसजगदीश्वर को सर्वव्यापक और सर्वबलदायक समझकर बड़े महात्माओं के समान अधिकारी बनकर संसार में बड़े-बड़े काम करें ॥८, ९॥
Footnote: ९−(इन्द्रस्य) परमैश्वर्यवतःपुरुषस्य (वः) (युष्मान्) (इन्द्रियेण) परमैश्वर्येण (अभि षिञ्चेत्) अभिषेकयुक्तान्राज्याधिकारिणः कुर्यात् ॥