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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
दुःख से छूटने का उपदेश।
Word-Meaning: - (यः) जो [दोष] (अप्सु)प्राणियों के भीतर (अग्निः) अग्नि [समान सन्तापक] है, (तम्) उस (म्रोकम्) हिंसक, (खनिम्) दुःखदायक और (तनूदूषिम्) शरीरदूषक [रोग] को (अति सृजामि) मैं नाश करताहूँ ॥७॥
Connotation: - विद्वान् पुरुषसन्तापकारी दोषों का विचारपूर्वक नाश करें ॥७॥
Footnote: ७−(यः) दोषः (अप्सु) म० १।प्रजासु (अग्निः) अग्निवत्सन्तापकः (अति सृजामि) म० ४ विनाशयामि (तम्) दोषम् (म्रोकम्) म० ३। हिंसकम् (खनिम्) विदारकम्। पीडकम् (तनूदूषिम्) शरीरदूषकम् ॥
