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इ॒दं तमति॑सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ॥

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Pad Path

इदम् । तम् । अति । सृजामि । तम् । मा । अभिऽअवनिक्षि ॥१.४॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:4


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

दुःख से छूटने का उपदेश।

Word-Meaning: - (इदम्) अब (तम्) उस [रोग] को (अति सृजामि) मैं नाश करता हूँ, (तम्) उस [रोग] को (मा अभ्यवनिक्षि)मैं कभी पुष्ट नहीं करूँ ॥४॥
Connotation: - मनुष्यों को योग्य हैकि जिन रोगों वा दोषों से आत्मा और शरीर में विकार होवे, उनको ज्ञानपूर्वकहटावें और कभी न बढ़ने दें ॥२-४॥
Footnote: ४−(इदम्) इदानीम् (तम्) रोगम् (अतिसृजामि)अतिसर्जनं वधे दाने च। विनाशयामि (तम्) रोगम् (मा अभ्यवनिक्षि) णिजिर्शौचपोषणयोः-लुङ, अडभावः। नैव पुष्येयम् ॥