Go To Mantra

म्रो॒को म॑नो॒हाख॒नो नि॑र्दा॒ह आ॑त्म॒दूषि॑स्तनू॒दूषिः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

म्रोक: । मन:ऽहा । खन: । नि:ऽदाह: । आत्मऽदूषि: । तनूऽदूषि: ॥१.३॥

Atharvaveda » Kand:16» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:3


Reads 57 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

दुःख से छूटने का उपदेश।

Word-Meaning: - (म्रोकः) सतानेवाला, (मनोहा) मन का नाश करनेवाला, (खनः) खोद डालनेवाला, (निर्दाहः) जलन करनेवाला, (आत्मदूषिः) आत्मा को दूषित करनेवाला, और (तनूदूषिः) शरीर को दूषित करनेवाला [जोरोग है] ॥३॥
Connotation: - मनुष्यों को योग्य हैकि जिन रोगों वा दोषों से आत्मा और शरीर में विकार होवे, उनको ज्ञानपूर्वकहटावें और कभी न बढ़ने दें ॥२-४॥
Footnote: ३−(म्रोकः) म्रुचु गतौवेदे तु हिंसने-घञ्, कुत्वम्। हिंसकः (मनोहा) मनोनाशकः (खनः) खनु विदारणे-अच्।विदारकः। पीडकः (निर्दाहः) निरन्तरदाहकः (आत्मदूषिः) आत्मदूषको रोगः (तनूदूषिः)शरीरदूषकः ॥