PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।
Word-Meaning: - (ऋतम्) यथार्थ विज्ञान (च च) और (सत्यम्) [विद्यमान जगत् का हितकारी] अविनाशी कारण (च) और (सूर्यः)सूर्य (च) और (चन्द्रः) चन्द्रमा (च) और (नक्षत्राणि) चलनेवाले तारे (तम्) उस [व्रात्य परमात्मा] के (अनुव्यचलन्) पीछे विचरे ॥५॥
Connotation: - परमात्मा के सामर्थ्यसे ही अविनाशी विज्ञान और जगत् का नित्य कारण और कार्यरूप सूर्य आदि पदार्थउत्पन्न होते हैं, ऐसा दृढज्ञानी पुरुष ईश्वरीय सत्यज्ञान को, कारणरूप औरकार्यरूप जगत् को यथावत् जानकर आनन्द पाता है ॥४, ५, ६॥
Footnote: ५, ६−(तम्) व्रात्यम् (ऋतम्) यथार्थविज्ञानम् (च) (सत्यम्) सत्-यत्। सते विद्यमानाय जगते हितम्।अविनाशि कारणम् (नक्षत्राणि) णक्ष गतौ-अत्रन्। गतिमन्तस्तारागणाः। अन्यद् गतंस्पष्टं च ॥
