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स ऊ॒र्ध्वांदिश॒मनु॒ व्यचलत् ॥

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स: । ऊर्ध्वाम् । दिशम् । अनु । वि । अचलत् ॥६.४॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:4


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (ऊर्ध्वाम्) ऊँची (दिशम् अनु) दिशा की ओर (वि अचलत्) विचरा ॥४॥
Connotation: - परमात्मा के सामर्थ्यसे ही अविनाशी विज्ञान और जगत् का नित्य कारण और कार्यरूप सूर्य आदि पदार्थउत्पन्न होते हैं, ऐसा दृढज्ञानी पुरुष ईश्वरीय सत्यज्ञान को, कारणरूप औरकार्यरूप जगत् को यथावत् जानकर आनन्द पाता है ॥४, ५, ६॥
Footnote: ४−(सः) व्रात्यः (ऊर्ध्वाम्) उपरिवर्तमानाम् ॥