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तंभूमि॑श्चा॒ग्निश्चौष॑धयश्च॒ वन॒स्पत॑यश्च वानस्प॒त्याश्च॑वी॒रुध॑श्चानु॒व्यचलन् ॥

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Pad Path

तम् । भूमि: । च । अग्नि: । च । ओषधय: । च । वनस्पतय: । च । वानस्पत्या: । च । वीरुध: । च । अनुऽव्यचलन् ॥६.२॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:2


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।

Word-Meaning: - (भूमिः) भूमि (च च) और (अग्निः) अग्नि [भौतिक अग्नि] (च) और (ओषधयः) ओषधें [जौ, गेहूँ, चावल आदि अन्न] (च) और (वनस्पतयः) वनस्पतियाँ [पीपल आदि वृक्ष] (च) और (वानस्पत्याः) वनस्पतियोंसे उत्पन्न पदार्थ [काष्ठ फूल, फल, मूल, रस आदि] (च) और (वीरुधः) लताएँ [सोमलताआदि] (तम्) उस [व्रात्य परमात्मा] के (अनुव्यचलन्) पीछे विचरे ॥२॥
Connotation: - जब विद्वान् पुरुषपरमात्मा को नीची आदि दिशाओं में सर्वव्यापक और सर्वनियन्ता जानकर उसके उत्पन्नकिये पृथिवी आदि पदार्थों का तत्त्वज्ञान प्राप्त करता है, तब वह उनसे यथावत्उपकार लेकर सुख पाता है ॥१-३॥
Footnote: २−(तम्) व्रात्यम् (भूमिः) (च) (अग्निः) भौतिकाग्निः (ओषधयः) यवव्रीह्याद्यन्नानि (च) (वनस्पतयः)पिप्पलादयो वृक्षाः (वानस्पत्याः) वनस्पति-ण्य। वनस्पतिभ्य उत्पन्नाःकाष्ठपुष्पफलमूलरसादयः (च) (वीरुधः) सोमलतादयः (च) (अनुव्यचलन्) अनुसृत्यव्यचरन् ॥