Go To Mantra

सोऽना॑दिष्टां॒दिश॒मनु॒ व्यचलत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

स: । अनादिष्टाम् । दिशम् । वि । अचलत् ॥६.१६॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:16


Reads 42 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (अनादिष्टाम्) बिना बताई हुई (दिशम् अनु) दिशा की ओर (वि अचलत्)विचरा ॥१६॥
Connotation: - मनुष्य को योग्य है किपरमात्मा को सब लोकों, लोकवालों और ऋतुओं आदि का स्वामी जानकर सब पदार्थों काविवेकी होवे और उन से यथावत् उपकार लेकर आनन्द पावे ॥१६, १७, १८॥
Footnote: १६−(सः) व्रात्यः (अनादिष्टाम्) अज्ञापिताम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥