Go To Mantra

स प॑र॒मांदिश॒मनु॒ व्यचलत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

स: । परमाम् । दिशम् । अनु । वि । अचलत् ॥६.१३॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:13


Reads 45 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (परमाम्) सबसे दूर (दिशम् अनु) दिशा की ओर (वि अचलत्) विचरा ॥१३॥
Connotation: - जो मनुष्य परमात्मामें ध्यान लगा कर संसार के उपकारी अग्निहोत्र आदि यज्ञ तथा विद्यादान औरविद्वानों के सत्कार आदि यज्ञ करता है, वह परमात्मा का भक्त संसार में अतिप्रशंसनीय होता है ॥१३, १४, १५॥
Footnote: १३−(सः) व्रात्यःपरमात्मा (परमाम्) अतिदूराम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥