Go To Mantra
Viewed 79 times

स ध्रु॒वांदिश॒मनु॒ व्यचलत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

स: । ध्रुवाम् । दिशम् । अनु । वि । अचलत् ॥६.१॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:1


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ईश्वर के सर्वस्वामी होने का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (ध्रुवाम्) नीची (दिशम् अनु) दिशा की ओर (वि अचलत्) विचरा ॥१॥
Connotation: - जब विद्वान् पुरुषपरमात्मा को नीची आदि दिशाओं में सर्वव्यापक और सर्वनियन्ता जानकर उसके उत्पन्नकिये पृथिवी आदि पदार्थों का तत्त्वज्ञान प्राप्त करता है, तब वह उनसे यथावत्उपकार लेकर सुख पाता है ॥१-३॥
Footnote: १−(सः) व्रात्यः (ध्रुवाम्) अधोवर्तमानाम् (दिशम्) (अनु) अनुलक्ष्य (व्यचलत्) विचरितवान् ॥