Devata: द्विपदा प्राजापत्या जगती
Rishi: अध्यात्म अथवा व्रात्य
Chhanda: अथर्वा
Swara: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Reads 39 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
Word-Meaning: - (वासन्तौ) वसन्तऋतुवाले (मासौ) दो महीने (प्राच्याः दिशः) पूर्व दिशा से (एनम्) उस [विद्वान्]की (गोपायतः) रक्षा करते हैं, [और दोनों] (बृहत्) बृहत् [बड़ा आकाश] (च च) और (रथन्तरम्) रथन्तर [रमणीय गुणों द्वारा पार होने योग्य जगत्] [उसके लिये] (अनुतिष्ठतः) विहित कार्य करते हैं, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्) व्यापक [व्रात्यपरमात्मा] को (वेद) जानता है ॥३॥
Connotation: - विद्वान् लोग निश्चयकरके मानते हैं कि जो मनुष्य परमात्मा में विश्वास करता है, वह पुरुषार्थी जनपूर्वादि दिशाओं और वसन्त आदि ऋतुओं में सुरक्षित रहता है ॥१-३॥
Footnote: ३−(एनम्)विद्वांसम् (गोपायतः) रक्षतः (अनुतिष्ठतः) सहवर्तेते। विहितकर्म कुरुतः (यः)विद्वान् (एवम्) इण् गतौ-वन्। व्यापकं व्रात्यं परमात्मानम् (वेद) जानाति। अन्यत्पूर्ववत्-म० १, २ ॥
