Devata: द्विपदा प्राजापत्या जगती
Rishi: अध्यात्म अथवा व्रात्य
Chhanda: अथर्वा
Swara: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Reads 56 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
परमेश्वर के रक्षा गुण का उपदेश।
Word-Meaning: - (शारदौ) शरद् ऋतुवाले (मासौ) दो महीने (उदीच्याः दिशः) उत्तरवाली दिशा से (एनम्) उस [विद्वान्] की (गोपायतः) रक्षा करते हैं, (च) और [दोनों] (श्यैतम्) श्यैत् [सद्गति बतानेवाला, वेदज्ञान] (च) और (नौधसम्) नौधस [ऋषियों का हितकारी मोक्षज्ञान] [उसके लिये] (अनु तिष्ठतः) विहित कर्म करते हैं, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्) व्यापक [व्रात्यपरमात्मा] को (वेद) जानता है ॥१२॥
Connotation: - मन्त्र १-३ के समान है॥१०-१२॥
Footnote: ११, १२−(शारदौ) शरत्सम्बन्धिनावाश्विनकार्त्तिकौ (श्यैतम्) सू० २।२२। श्येत-अण्। श्येतस्य सद्गतेःप्रतिपादकं वेदज्ञानम् (नौधसम्) सू० २।२२। नोधस्-अण्। नोधसाम् ऋषीणां हितकरंमोक्षज्ञानम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥
