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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
परमात्मा के विराट् रूप का उपदेश।
Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यपरमात्मा] (अब्रवीत्) बोला−(आसन्दीम्) सिंहासन् (मे) मेरे लिये (सम्) मिलकर (भरन्तु इति) आप धरें ॥२॥
Connotation: - ऋषि लोग अनुभव करतेहैं कि वह परमात्मा सर्वोपरि विराजकर अपनी महिमा दिखा रहा है ॥२॥
Footnote: २−(सः) व्रात्यः (अब्रवीत्) (आसन्दीम्) सिंहासनम् (मे) मह्यम् (सम्) संगत्य (भरन्तु) धरन्तुभवन्तः (इति) ॥
