Go To Mantra
Viewed 78 times

तस्य॒व्रात्य॑स्य।योऽस्य॑ पञ्च॒मोऽपा॒नः सा दी॒क्षा ॥

Mantra Audio
Pad Path

तस्य । व्रात्यस्य । य: । अस्य । पञ्चम: । अपान: । सा । दीक्षा ॥१६.५॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:16» Paryayah:0» Mantra:5


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि के सामर्थ्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (तस्य) उस (व्रात्यस्य) व्रात्य [सत्यव्रतधारी अतिथि] का−(यः) जो (अस्य) इस [व्रात्य] का (पञ्चमः) पाचवाँ (अपानः) अपान [प्रश्वास] है, (सा दीक्षा) वह दीक्षा है [वह नियमऔर व्रतपालन की शिक्षा करता है] ॥५॥
Connotation: - जैसे सामान्य मनुष्यज्ञानप्राप्ति के लिये पौर्णमासी आदि यज्ञ करके श्रद्धावान् होते हैं, वैसे हीविद्वान् अतिथि संन्यासी उस कार्मिक यज्ञ आदि के स्थान पर अपनी जितेन्द्रियतासे मानसिक यज्ञ करके यज्ञफल प्राप्त करते हैं, अर्थात् ब्रह्मविद्या,ज्योतिषविद्या आदि अनेक विद्याओं का प्रचार करके संसार में प्रतिष्ठा पाते हैं॥१-७॥
Footnote: ५−(दीक्षा) नियमव्रतयोःशिक्षा। अन्यत् पूर्ववत् स्पष्टं च ॥