Go To Mantra

तस्य॒व्रात्य॑स्य।योऽस्य॑ चतु॒र्थोऽपा॒नः सा श्र॒द्धा ॥

Mantra Audio
Pad Path

तस्य । व्रात्यस्य । य: । अस्य । चतुर्थ: । अपान: । सा । श्रध्दा ॥१६.४॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:16» Paryayah:0» Mantra:4


Reads 53 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि के सामर्थ्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (तस्य) उस (व्रात्यस्य) व्रात्य [सत्यव्रतधारी अतिथि] का−(यः) जो (अस्य) इस [व्रात्य] का (चतुर्थः) चौथा (अपानः) अपान [प्रश्वास] है, (सा श्रद्धा) वह श्रद्धा है [वहज्ञानी पुरुष जितेन्द्रियता से श्रद्धा प्राप्त करता है] ॥४॥
Connotation: - जैसे सामान्य मनुष्यज्ञानप्राप्ति के लिये पौर्णमासी आदि यज्ञ करके श्रद्धावान् होते हैं, वैसे हीविद्वान् अतिथि संन्यासी उस कार्मिक यज्ञ आदि के स्थान पर अपनी जितेन्द्रियतासे मानसिक यज्ञ करके यज्ञफल प्राप्त करते हैं, अर्थात् ब्रह्मविद्या,ज्योतिषविद्या आदि अनेक विद्याओं का प्रचार करके संसार में प्रतिष्ठा पाते हैं॥१-७॥
Footnote: ४−(श्रद्धा)गुरुवेदादिवाक्येषु विश्वासः। अन्यत् पूर्ववत् स्पष्टं च ॥