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म॒न्युना॑न्ना॒देनान्न॑मत्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

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मन्युना । अन्नऽअदेन । अन्नम् । अत्ति । य: । एवम् । वेद॥१४.२०॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:14» Paryayah:0» Mantra:20


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथिके उपकार का उपदेश।

Word-Meaning: - वह [अतिथि] (अन्नादेन)जीवनरक्षक (मन्युना) ज्ञान से (अन्नम्) जीवन की (अत्ति) रक्षा करता है, (यः) जो (एवम्) व्यापक परमात्मा को (वेद) जानता है ॥२०॥
Connotation: - मन्त्र १, २ के समान॥१९, २०॥
Footnote: १९, २०−(देवान्)विदुषः पुरुषान् (ईशानः) समर्थः (मन्युम्) यजिमनिशुन्धि०। उ० ३।२०। मनज्ञाने-युच्। मन्युर्मन्यतेर्दीप्तिकर्मणः क्रोधकर्मणो वधकर्मणो वा-निरु०१०।२९। ज्ञानम्। प्रकाशम् (मन्युना) ज्ञानेन। अन्यत् पूर्ववत्-म० १, २ ॥