Devata: भुरिक् नागी गायत्री
Rishi: अध्यात्म अथवा व्रात्य
Chhanda: अथर्वा
Swara: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Reads 54 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथिके उपकार का उपदेश।
Word-Meaning: - (सः) वह [व्रात्यअतिथि] (यत्) जब (देवान् अनु) विद्वानों की ओर (व्यचलत्) विचरा, वह (ईशानः)समर्थ (भूत्वा) होकर और (मन्युम्) ज्ञान को (अन्नादम्) जीवनरक्षक (कृत्वा) करके (अनुव्यचलत्) लगातार चला गया ॥१९॥
Connotation: - मन्त्र १, २ के समान॥१९, २०॥
Footnote: १९, २०−(देवान्)विदुषः पुरुषान् (ईशानः) समर्थः (मन्युम्) यजिमनिशुन्धि०। उ० ३।२०। मनज्ञाने-युच्। मन्युर्मन्यतेर्दीप्तिकर्मणः क्रोधकर्मणो वधकर्मणो वा-निरु०१०।२९। ज्ञानम्। प्रकाशम् (मन्युना) ज्ञानेन। अन्यत् पूर्ववत्-म० १, २ ॥
