Reads 49 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथि और अनतिथि के विषय का उपदेश।
Word-Meaning: - (तत्) सो (एवम्)व्यापक परमात्मा को (विद्वान्) जानता हुआ (व्रात्यः) व्रात्य [सत्यव्रतधारी] (अतिथिः) अतिथि (द्वितीयां रात्रिम्) दूसरी रात्रि (यस्य) जिस [गृहस्थ] के (गृहे) घर में (वसति) वसता है ॥३॥
Connotation: - गृहस्थ यथावत् सत्कारसे अतिथि को दूसरे दिन ठहराकर उससे अन्तरिक्षविद्या प्राप्त करे ॥३, ४॥
Footnote: ३, ४−(अन्तरिक्षे)भूलोकसूर्यमध्यवर्तिनि लोके। अन्यत् पूर्ववत् स्पष्टं च ॥
