Go To Mantra

तस्या॑मे॒वास्य॒तद्दे॒वता॑यां हु॒तं भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

तस्याम् । एव । अस्य । तत् । देवतायाम् । हुतम् । भवति । य: । एवम् । वेद ॥१३.१४॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:13» Paryayah:0» Mantra:14


Reads 55 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि और अनतिथि के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (तस्याम् एव) (तत्) वह (हुतम्) दान (भवति) होता है, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्) व्यापक [परमात्मा] को (वेद) जानता है ॥१४॥
Connotation: - गृहस्थ को योग्य है किपूर्वोक्त प्रकार से छली-कपटी झूठे वेषधारी को दण्ड देवे और जो सत्यव्रतधारीब्रह्मज्ञानी अतिथि हो, उसका यथावत् आदर मान करे और सब प्रकार जल, अन्न, स्थानआदि से उसकी सेवा करे ॥१३, १४॥
Footnote: १४−(तस्याम्) (एव) निश्चयेन (तत्) पूर्वोक्तम् (देवतायाम्) देवे। विदुषि पुरुषे (हुतम्) दानम् (भवति) (यः) अतिथिः (एवम्)व्यापकं परमात्मानम् (वेद) जानाति ॥