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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथि और अनतिथि के विषय का उपदेश।
Word-Meaning: - (तस्याम् एव) (तत्) वह (हुतम्) दान (भवति) होता है, (यः) जो [विद्वान्] (एवम्) व्यापक [परमात्मा] को (वेद) जानता है ॥१४॥
Connotation: - गृहस्थ को योग्य है किपूर्वोक्त प्रकार से छली-कपटी झूठे वेषधारी को दण्ड देवे और जो सत्यव्रतधारीब्रह्मज्ञानी अतिथि हो, उसका यथावत् आदर मान करे और सब प्रकार जल, अन्न, स्थानआदि से उसकी सेवा करे ॥१३, १४॥
Footnote: १४−(तस्याम्) (एव) निश्चयेन (तत्) पूर्वोक्तम् (देवतायाम्) देवे। विदुषि पुरुषे (हुतम्) दानम् (भवति) (यः) अतिथिः (एवम्)व्यापकं परमात्मानम् (वेद) जानाति ॥
