Go To Mantra

य ए॒वाप॑रिमिताः॒पुण्या॑ लो॒कास्ताने॒व तेनाव॑ रुन्द्धे॥

Mantra Audio
Pad Path

ये । एव । अपरिऽमिता: । पुण्या: । लोका: । तान् । एव । तेन । अव । रुन्ध्दे ॥१३.१०॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:13» Paryayah:0» Mantra:10


Reads 47 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि और अनतिथि के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (ये) जो (एव) निश्चयकरके (अपरिमिताः) असंख्य (पुण्याः) पवित्र (लोकाः) लोक [दर्शनीय समाज] हैं, (तान्) उनको (एव) निश्चय करके (तेन) उस [अतिथिसत्कार] से (अव रुन्द्धे) वह [गृहस्थ] सुरक्षित करता है ॥१०॥
Connotation: - जब मनुष्य को बड़ेविद्वान् अतिथि से बहुत दिनों सत्सङ्ग करने का अवसर मिले, तो वह उससेब्रह्मविद्या, राज्यविद्या आदि अनेक शुभविद्याएँ प्राप्त करके उन्नति करे ॥९, १०॥
Footnote: ९, १०−(अपरिमिताः)असंख्याताः (रात्रीः) (लोकाः) दर्शनीयाः॥