Go To Mantra

स य ए॒वंवि॒दुषा॒ व्रात्ये॒नाति॑सृष्टो जु॒होति॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

स: । य: । एवम् । विदुषा । व्रात्येन । अतिऽसृष्ट: । जुहोति ॥१२.४॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:12» Paryayah:0» Mantra:4


Reads 54 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

यज्ञ करने में विद्वान् की सम्मति का उपदेश।

Word-Meaning: - (यः) जो [गृहस्थ] (एवम्) व्यापक परमात्मा को (विदुषा) जानते हुए (व्रात्येन) व्रात्य [सत्यव्रतधारी अतिथि] करके (अतिसृष्टः) आज्ञा दिया हुआ (जुहोति) यज्ञ करता है, (सः) वह [गृहस्थ] ॥४॥
Connotation: - गृहस्थ को योग्य है किआदरपूर्वक विद्वान् मर्यादापुरुष सत्यव्रतधारी अतिथि की आज्ञा से उत्तम-उत्तमकर्म करता रहे, जिससे उसकी मर्यादा और कीर्ति संसार में स्थिर होवे ॥४-७॥
Footnote: ४−(सः) गृहस्थः (यः)गृहस्थः (एवम्) व्यापकं परमात्मानम् (विदुषा) जानता (व्रात्येन)सत्यव्रतधारिणाऽतिथिना (अतिसृष्टः) आज्ञापितः (जुहोति) यज्ञं करोति ॥