Go To Mantra

ऐनं॑ प्रि॒यंग॑च्छति प्रि॒यः प्रि॒यस्य॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

आ । एनम् । प्रियम् । गच्छति । प्रिय: । प्रियस्य । भवति । य: । एवम् । वेद ॥११.७॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:11» Paryayah:0» Mantra:7


Reads 45 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथिसत्कार के विधान का उपदेश।

Word-Meaning: - (एनम्) उस [गृहस्थ] को (प्रियम्) प्रिय पदार्थ (आ) आकर (गच्छति) मिलता है, वह (प्रियस्य) अपने इष्ट मित्र का (प्रियः) प्रिय (भवति) होता है, (यः) जो (एवम्) ऐसे [विद्वान्] को (वेद) जानता है ॥७॥
Connotation: - आदरपूर्वक अतिथि को उसका प्रिय पदार्थ अर्पण करने से गृहस्थ अपना इष्ट पदार्थ उत्तम ज्ञानादि प्राप्त करके अपने मित्रों का प्रिय होवे ॥६, ७॥