Devata: निचृत् आर्ची बृहती
Rishi: अध्यात्म अथवा व्रात्य
Chhanda: अथर्वा
Swara: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथिसत्कार के विधान का उपदेश।
Word-Meaning: - (यत्) जब (एनम्) इस [अतिथि] से (आह) वह [गृहस्थ] कहता है−(व्रात्य) हे व्रात्य ! [उत्तम व्रतधारी] (यथा) जैसे (ते) तेरा (प्रियम्) प्रिय हो (तथा) वैसा ही (अस्तु इति) होवे−(तेन) उस [सत्कार] से (एव) निश्चय करके (प्रियम्) अपने प्रिय वस्तु को (अव रुन्द्धे) वह [गृहस्थ] सुरक्षित करता है ॥६॥
Connotation: - आदरपूर्वक अतिथि को उसका प्रिय पदार्थ अर्पण करने से गृहस्थ अपना इष्ट पदार्थ उत्तम ज्ञानादि प्राप्त करके अपने मित्रों का प्रिय होवे ॥६, ७॥
